स.क.हा.स्कूल नई अबादी में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से संबंधित मनाया गया वार्षिक समागम


होशियारपुर : स.क.हा.स्कूल नई अबादी में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से संबंधित वार्षिक समागम मनाया गया, जिस में श्रीमती हरजिंदर कौर (डी.ई.ओ., एलीमेंट्री) ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस समागम की शान प्रसिद्ध समाज सुधारका श्री परमजीत सिंह सचदेवा इस अवसर पर विशेष तौर पर शामिल हुए। इस समागम में एडवोकेट श्री आशीष ज्योति तथा श्री बलवीर सिंह , पैरा लीगल वालंटियर ने छात्राओं को भविष्य में आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दी और संबंधित कानूनी जानकारी दी। समागम में प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री श्रीमती सुमन तथा समाज सेवी राजिंदर प्रसाद भी विशेष तौर पर शामिल हुए।
श्रीमती मोनिका जैन (सी.एच.टी., जी.ई.एस. नई आबादी), श्री राजिंदर प्रसाद शर्मा और श्रीमती सुमन शर्मा, एस.एम.सी. सदस्य तथा पुरस्कार विजेताओं के माता-पिता उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने अपने कीमती विचार छात्राओं के साथ सांझे किए। समागम की शुरुआत शब्द गायन से की गई।

समागम में छात्राओं ने सांस्कृतिक गीत, नाच, थीम आधारित नाटक, स्क्टि, नुक्कड़ नाटक, कहानी सुनाना, कविता गायन, गिद्धा, भांगड़ा आदि प्रस्तुत किए। मंच संचालिका की भूमिका श्रीमती आशु वालिया ने शेरो शायरी के साथ बाखुबी निभाई। वर्ष 2024-25 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करने वाली छात्राओं को श्रीमती हरजिंदर कौर, जिला शिक्षा अधिकारी (एलीमेंट्री शिक्षा) द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए।
इस अवसर पर श्रीमती हरजिंदर कौर, जिला शिक्षा अधिकारी तथा प्रसिद्ध समाज सेवी श्री परमजीत सिंह सचदेवा द्वारा स्कूल की वार्षिक पत्रिका ’धियां दे अल्फ़ाज़’ के पांचवें संस्करण का विमोचन भी किया गया। उन्होने छात्राओं को और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया और भविष्य में आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दी। समागम के अंत में श्रीमती मनिंदरजीत कौर ने वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी तथा समूचे वर्ष का लेखा जोखा पेश किया। समारो का मुख्य आकर्षण मुख्य अध्यापिका श्रीमती दीप्ति ढिल्लों का भाषण रहा जिन्होने अपने निजी अनुभवों के बारे में बताया तथा आये हुए मुख्य मेहमानों तथ अन्य मेंहमानों, अभिभावकों, अध्यापकों तथा छात्राओं का धन्यवाद किया। इस समागम में समूह अध्यापक, समूह छात्रायें, छात्राओं के अभिभावक तथा सी.एच.टी. श्रीमती मानिका जैन भी उपस्थित थे। इस प्रकार यह समागम एक यादगार बन कर संपन हुआ।




