जहां नि:स्वार्थ व निष्काम भावना होती है, वहां बंधन कभी नहीं टूटतेः धीरज कृष्ण


होशियारपुर : श्री नंद अन्नपूर्णा चैरीटेबल सोसायटी की तरफ से ब्रह्मर्षि नन्द किशोर शास्त्री जी महाराज के आशीर्वाद से करवाए जा रहे श्री रुद्र चण्डी महायज्ञ के तीसरे दिन विकेश सिंगला व दिव्य सिंगला ने मुख्य यजमान के तौर पर पूजा अर्चना की और यज्ञ में आहुति डालीं। आचार्य राजिंदर प्रसाद ने यज्ञशाला की परिक्रमा के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि इससे शारीरिक रोग के अलावा मानसिक, बौद्धिक दुर्बलता का अविलंब नाश होता है। साथ में वेदमंत्रों द्वारा स्थापित देवताओं तथा वेदपाठियों का आशीर्वाद मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।

इस बीच शुरु हुई श्रीमद्भागवत कथा में कथारसपान करवाते हुए धीरज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बिना प्रेम की भक्ति कुछ दिन की होती है, उदाहरण के तौर पर जहां पानी पड़ा होता है, वहां चिकनाई होती है। जब ये पानी सुख जाता है, तब चिकनाई खत्म हो जाती है। इसी प्रकार प्रेम नि:स्वार्थ है, निष्काम है। जहां प्रेम होता है, वहां बंधन कभी नहीं टूटते हैं। लेकिन जहां स्वार्थ होता है, वह बंधन टूट जाता है। प्रेम मांगने की नहीं है, ये देय है अथवा भागवत प्रेम है।
इस दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का महात्म बताया और कहा कि जैसे छोटे बच्चे को रुपये और कागज में कोई अंतर पता नहीं होता तथा जब हम बच्चे को उसका महत्व बताते हैं तो वह उसे संभाल कर रखना सीख जाता है। उसी प्रकार जब हम श्रमद्भागवत के महात्म के बारे में जान जाते हैं तो हम उससे जुड़ते हैं तथा उसके अनुसार जीवन यापन करने का यत्न करते हैं।

भागवत सच्चिदानंद है, इसका अर्थ सत्-चित्-आनंद, यह परम अपरिवर्तनशील वास्तविकता के व्यक्तिपरक अनुभव का एक विशेषण और विवरण है। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण मात्र से मनुष्य भवसागर पार हो जाते हैं। इस मौके पर प्रधान रमेश अग्रवाल, महामंत्री तरसेम मोदगिल, विकास सिंगला, दक्ष, रौनक, ममता जैन, नमन जैन, सविता, रमनकांत, शशि, किरण, गोदनी, प्रेम, प्रवीन, पूनम, जगदीश अग्रवाल, पल्लवी, रुची, आर्यन, नीतिश, मानवी, रमेश गम्भीर, रजनी गंभीर, वृज बिहारी, नीलम रानी, जानवी, प्रकाशी, सुनीता गोयल, सुमन भल्ला एवं सुषमा अग्रवाल सहित अन्य भक्तजन मौजूद थे।




