Hoshairpur

राष्ट्रीय लोक अदालत में 29,451 मामलों की सुनवाई, 26,069 का मौके पर निपटारा

होशियारपुर, 14 मार्च: पंजाब राज्य कानूनी सेवा अथॉरिटी, एस.ए.एस. नगर के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी, होशियारपुर की ओर से शनिवार को जिले में वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह लोक अदालत जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-चेयरमैन, जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी राजिंदर अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

इस लोक अदालत में एन.आई. एक्ट की धारा 138 से संबंधित मामले (लंबित व प्री-लिटिगेशन बैंक रिकवरी केस), श्रम विवाद, मोटर दुर्घटना दावा मामले, बिजली-पानी के बिलों से जुड़े मामले (गैर-कंपाउंडेबल मामलों को छोड़कर), वैवाहिक विवाद, ट्रैफिक चालान, राजस्व मामले तथा अन्य सिविल व कम गंभीर आपराधिक मामलों सहित घरेलू विवादों को सुनवाई के लिए रखा गया।

जानकारी देते हुए सीजेएम-कम-सचिव ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी नीरज गोयल ने बताया कि लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 19 बेंचों का गठन किया गया। इनमें होशियारपुर न्यायालय परिसर में 9 बेंच, सब-डिवीजन दसूहा में 2 बेंच, मुकेरियां में 1 बेंच, गढ़शंकर में 2 बेंच तथा राजस्व अदालतों के 5 बेंच शामिल थे।

उन्होंने बताया कि जिला होशियारपुर की लोक अदालत में कुल 29,451 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से 26,069 मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। इसके साथ ही पक्षकारों के पक्ष में कुल 13,84,84,145 रुपए के अवार्ड पारित किए गए।

राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी के कर्मचारियों और पैरा लीगल वालंटियरों की ओर से ट्रैफिक चालान भुगतान के लिए विशेष हेल्प डेस्क भी लगाए गए, ताकि लोगों को अदालतों में लंबित ट्रैफिक चालानों का भुगतान करने में सुविधा मिल सके।

इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-चेयरमैन, जिला कानूनी सेवा अथॉरिटी राजिंदर अग्रवाल व सीजेएम-कम- सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी नीरज गोयल ने विभिन्न लोक अदालत बेंचों का दौरा किया। इस आयोजन को सफल बनाने में बार एसोसिएशन होशियारपुर ने भी पूरा सहयोग दिया।

सचिव ज़िला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी ने बताया कि लोक अदालत में लंबे समय से लंबित और कई जटिल मामलों का भी निपटारा किया जाता है। इसी प्रकार आज की लोक अदालत में सिविल अपील नंबर 12/2022 (सी.आई.एस. नंबर सिविल अपील/77/2022), बलजीत कौर व एक अन्य बनाम जसविंदर कौर व अन्य का मामला भी रखा गया, जो जिला एवं सत्र न्यायाधीश, होशियारपुर की अदालत में विचाराधीन था।

यह विवाद वर्ष 2014 में शुरू हुआ था, जब वादियों/उत्तरदाताओं ने पक्षों की साझा संपत्ति के बंटवारे के माध्यम से अलग कब्जा प्राप्त करने के लिए मुकदमा दायर किया था। वादियों/उत्तरदाताओं का दावा था कि वे विवादित संपत्ति में अपने हिस्से का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए उनके हिस्से की संपत्ति को अलग किया जाना आवश्यक है।

हालांकि बचाव पक्ष ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वादियों/उत्तरदाताओं का उक्त संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है और बचाव पक्ष/अपीलकर्ता ही संपत्ति के वास्तविक मालिक हैं। इस मामले में 15.02.2022 को पक्षों के हिस्से घोषित करते हुए प्रारंभिक डिक्री पारित की गई थी, जिसके विरुद्ध 17.03.2022 को वर्तमान अपील दायर की गई और पक्षों के बीच विवाद जारी रहा।

अंततः जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजिंदर अग्रवाल के प्रयासों से 10.03.2026 और 13.03.2026 को आयोजित प्री-लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। इसके पश्चात आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में लोक अदालत बेंच नंबर 01 की अध्यक्षता कर रहे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जसविंदर शिमार द्वारा इस मामले का अंतिम निपटारा कर दिया गया।

सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी नीरज गोयल ने आम जनता से अपील की कि वे अपने मामलों को लोक अदालत में लगाकर अधिक से अधिक लाभ उठाएं, क्योंकि इससे समय और धन दोनों की बचत होती है। लोक अदालत में दिए गए फैसले अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ किसी प्रकार की अपील नहीं होती, जिससे पक्षों के बीच आपसी सौहार्द भी बढ़ता है।

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