कृष्ण-सुदामा प्रसंग से संत वृंदावन दास ने दी मित्रता, प्यार और बंधन को निभाने की प्रेरणा


होशियारपुर ( हरपाल लाडा ): फतेहगढ़ चौक से रहीमपुर मार्ग पर उप्पल अस्पताल के समीप डावर परिवार की तरफ से करवाई जा रही श्री मद्भागवत कथा के अंतिम दिन संत वृंदावन दास जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए भगवान द्वारा उसका उद्धार किए जाने की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि सुदामा गरीबी से बेहाल था और उसकी पत्नी ने किसी तरह से सुदामा को अपने मित्र द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण से मिलने के लिए भेजा। कथाओं में वर्णन आता है कि सुदामा के पास फटी धोती थी और वह जब महल के पास पहुंचा तो उसने द्वारपालों को भगवान को उसके आने की बात कही।

पहले तो द्वारपाल हंसे और फिर एक द्वारपाल ने सुदामा की बात सुनी और भगवान को संदेशा भेजा। भगवान ने जैसे ही सुना कि द्वार पर सुदामा आया है तो वह नंगे पांव ही दौड़ पड़े। भगवान को इस प्रकार दौड़ता देख सभी उनके पीछे दौड़ने लगे तथा जब भगवान ने सुदामा को देखा तो कस के गले से लगा लिया और आदरपूर्वक महल में लेकर आए व अपने आसन पर बिठाया।
भगवान ने जब पूछा कि वह उनके लिए क्या सौगात लाया है तो सुदामा छिपाने लगा। लेकिन भगवान उससे छीन कर तंदुल (चावलों के दाने) खाने लगते हैं तो सुदामा की आश्रुधारा बह निकलती है। लेकिन उसे क्या पता था कि भगवान जितनी मुट्ठी खा रहे हैं उतने ही सुदामा के कष्ट कट रहे हैं।

भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता हमें प्यार और बंधन को निभाने की सीख व प्रेरणा देती है। इस दौरान उनके गाए भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमें और आरती उपरांत भंडारा लगाया गया। इस मौके पर चेयरमैन संदीप सैनी, चेयरमैन करमजीत कौर, भाजपा नेत्री मीनू सेठी, श्री राम चरित मानस प्रचार मंडल के प्रधान हरीश सैनी, कृष्ण गोपाल आनंद, युवा समाज सेवी सोनू अरोड़ा, पं. ओमकार नाथ शर्मा, पूर्व चेयरमैन एडवोकेट राकेश मरवाहा, तरसेम मोदगिल, मुकेश डावर, प्यारे लाल सैनी, तरसेम लाल डावर, मुकेश डावर, मोहन लाल पहलवान, तरसेम मोदगिल, रमेश अग्रवाल, मेहर चंद वालिया, सन्नी महाजन, अशोक शर्मा, बलविंदर कतना, सुभाष मेहता, कृष्ण गोपाल शर्मा, पवन शर्मा, कमल वर्मा, हरीश शर्मा काला, प्यारे लाल सैनी, सरपंच नरवीर नंदी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण की। कथा उपरांत भंडारा लगाया गया।




