Hoshairpur

सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी

होशियारपुर 14 सितंबर : योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में साप्ताहिक सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम गुरु के पास बहुत कुछ पाने के लिए जाते हैं लेकिन गुरु केवल यही चाहते हैं कि उनका शिष्य उनके बताए हुए मार्ग पर चले। प्रभु जी ने हमारे सामने योग की विद्या को ला कर रखा है। वह यही चाहते है कि हम उस पर चले। चाहे हम किसी भी अवस्था में हो हमें योग करना चाहिए।

पूर्ण योग उन्होंने हमारे सामने रखा और उसमें हठयोग और राजयोग प्रमुख है। दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं किसी एक को करने से काम नहीं बनेगा। आज संसार राजयोग को ना मात्र ही जानता है, उसे करना बहुत मुश्किल है। हम हठ योग तब करते हैं जब हम बीमार होते हैं और डॉक्टर के पास जाकर लाभ नहीं होता तो हम योग की तरफ आते हैं। हम लोग सत्संग में आते हैं तो हमें योग जरूर करना चाहिए। हम हर रोज कितने काम करते हैं एक घंटा निकाल कर योग भी करें।

योगी को ना कपड़ा चाहिए होता है ना धन और ना बढ़िया खाना। वह तो अल्पाहार में ही गुजारा कर लेता है। लोग योग करना चाहते हैं। लेकिन वह टेलीविजन पर देखकर करने का प्रयास करते हैं। जबकि योग का नियम है कि इसे गुरु के पास जाकर ही करना चाहिए। यह एक सूक्ष्म विद्या है। राजयोग में यम और नियम है। हठयोग के साथ केवल नियम मिलते हैं। इसमें शरीर की शुद्धि के साथ हम मन की शुद्धि की तरफ आते हैं। मन की शुद्धि का नाम संतोष है।

अगर मन में संतोष नहीं होगा तो उसमें वैर विरोध आएगा। योगी का मन कड़ा होता है वह घबराते नहीं है इसी को तप कहते हैं। इसके बाद स्वाध्याय है जो हमारी बुद्धि के लिए है। बुद्धि सबसे बड़ी चीज है। अगर इसमें ज्ञान ना हो तो काम नहीं बनेगा। बुद्धि के नष्ट होने पर सब नष्ट।हो जाता है। स्वाध्याय से ज्ञान मिलता है इससे आत्मा का चिंतन होता है। स्वाध्याय के लिए हम किताबें पढ़ते हैं। कौन सा ग्रन्थ पढ़ना है इसका ज्ञान गुरु ही हमें देता है। लेकिन हम स्वाध्याय के लिए समय नहीं निकालते।

गुरु के पास बैठकर हम जो बातें करते हैं वह उपनिषद बन जाते हैं। अगर हमने ज्ञान लेना है तो गुरु के पास जाकर खुलकर बात करनी होगी। जो भी पढ़ो उस पर मनन भी करो।ग्रंथों को पढ़ने के बाद उसमें जो चीज बताई गई है उसकी प्राप्ति के लिए धीरे-धीरे प्रयास करें। ज्ञान की पहचान कर्म है।

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